डिप्रेशन की परिभाषा एवं उसका मेथड क्या है और इससे बचने के उपाय ?

  फिटनेस

डिप्रेशन की परिभाषा

हम सब ज़िंदग़ी में कभी न कभी थोड़े समय के लिए नाख़ुश होते हैं मगर डिप्रेशन यानी अवसाद उससे कहीं ज़्यादा गहरा, लंबा और ज़्यादा दुखद होता है।इसकी वजह से लोगों की ज़िंदगी से रुचि ख़त्म होने लगती है और रोज़मर्रा के कामकाज से मन नहीं लगता है। डिप्रेशन के शिकार व्यक्ति के मन में कई तरह के विचार पनपने लगते है और वो अपने आप को हताश महसूस करने लगता है। डिप्रेशन में व्यक्ति अपने आप को असहाये समझने लगता है कई बार तो आत्महत्या के बारे में भी सोचने लगता है। माना जाता है कि 5 में से एक व्यस्क डिप्रेशन का शिकार होता है। डिप्रेशन एक मनोवैज्ञानिक बीमारी हैं। डिप्रेशन सिर्फ बड़ों को ही नहीं बल्कि बच्चों को भी होने लगा है। इसलिए अगर कोई व्यक्ति डिप्रेशन में हो तो तुरंत उनकी मदद करनी चाहिए ।

डिप्रेशन के लक्षण-

सर्व प्रथम यह बात समझने की जरूरत है कि जो लोग डिप्रेशन में होते हैं उन्हें असल में पता ही नहीं चल पाता कि वे डिप्रेशन में हैं। ऐसे में जरूरी है कि पीड़ित व्यक्ति के करीबी उसमें डिप्रेशन के लक्षणों की पहचान करें और उसकी मदत करे ।

  1. हमेशा शांत रहना और रोजाना के किसी भी काम में रुचि न लेना। दोस्त, परिवार और सोसाइटी से भी कट जाना।
  2. ज्यादा चिंता करना, जीवन के प्रति नकारात्मक नजरिया रखना, बात-बात पर गुस्सा करना, दुखी रहना।
  3. नींद न आना यानी अनिद्रा का शिकार हो जाना।
  4. खुद को कोसते रहना और खुशी के मौकों पर भी दुखी ही रहना। हमेशा नेगेटिव बातें करना और किसी से भी मिलने-जुलने से बचना।
  5. ज्यादा खाना खाना या सामान्य से कम खाना और चिढ़कर या झल्लाकर जवाब देना।
  6. वजन का अचानक बढ़ रहा है या फिर तेजी से कम हो रहा है तो यह भी डिप्रेशन का एक लक्षण हो सकता है। इसके अलावा हमेशा थका-सा महसूस करना भी डिप्रेशन की निशानी है।
  7. किसी भी काम का निर्णय ना ले पाना और कहीं पर मन न लगना।
  8. खान पान की आदतों में बदलाव करना।
  9. ज़िन्दगी के प्रति उलझा हुआ नज़रिया और खान-पान में बदलाव।
  10. आत्महत्या के बारे में सोचना।
  11. हमेशा रोने का मन करना।
  12. मन की एकाग्रता खोना, मन का एकाग्र न हो पाना।
  13. चिड़चिड़ा हो जाना।
  14. ऊर्जा का स्‍तर कम हो जाना।
  15. आनन्द वाली किसी भी चीज़ में आनन्द ना उठा पाना। पूरा पढ़े। 

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